रेशम के धागो में भाई बहन का प्यार…

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रेशम के धागो में भाई बहन का प्यार…

सावन की रिमझिम फुहारो के साथ भाई-बहन के रिश्ते का अनोखा त्यौहार
रक्षा-बंधन विशेष रुप से भारत में ही मनाया जाता है।  रक्षा बंधन के लिए
१५ दिन पहले से तैयारियां प्रारंभ हो जाती है। बाजारों में राखियों की
दुकाने सजने लगती है। कई जगह राखियों के ठेले व छोटी-छोटी दुकाने भी लगना
शुरु हो जाती है। रंग-बिरंगी सुंदर-सुंदर राखियां बहनो को मोहित करने
लगती है। बच्चियों से लेकर वृद्ध महिलाएं तक अपने भाईयों के लिए राखियां
खरीदती है। आजकल बाजारों में राखियां भी कई तरह की मिलने लगी है। बच्चों
के लिए डोरेमोन,भीम,एंग्री बर्ड,छोटा गणेश,मिकी माउस,इसी तरह यंग लोगो के
लिए डायमंड,चंदन लकड़ी,छोटा  श्रीफल व चावल,छोटे-बडे रूद्राक्ष, सिक्के
पर उबरे हुए साई व गणेश,ओम स्वास्तिक,कोड़ी,प्रीसियस स्टोन,रंग-बिरंगे
मोती,आर्टफिशल फूल, सोने चांदी की राखियां व नन्दो की चुड़ा राखियां व
भगवान के लिए बारिक रेशम के फुंदे वाली राखियां,रंग-बिरंगे सितारो से
जड़ा हुआ नारियल भी बाजार में मिलने लगते है।
रक्षा बंधन भाई बहन के प्यार का त्यौहार है भाई बहन के लड़ाई झगड़े
के बाद भी प्यार हमेशा बना रहता है। भाई रक्षा बंधन पर राखी बंधवाते समय
बहन की जीवन भर रक्षा करने व हमेशा मदद करने का वचन देता है। बहने भी भाई
की दाई कलाई में रेशम की डोर बंाधते समय यही कामना करती है कि भाई की
लम्बी आयू हो सदा उन्नति करे। अर्थात दोनो एक दूसरे की रक्षा की कामना
करते है।
हमारी पौराणिक कथाओं में भी रक्षा बंधन का विशेष महत्व बताया
गया है। पुराणों के अनुसार सबसे पहले लक्ष्मी जी ने मंत्रो की शक्ति से
मत्रा हुआ रेशम का धागा विष्णु भगवान के हाथ में बांधा था। इसी प्रकार
वामनअवतार नामक कथा में भी रक्षा बंधन का प्रसंग मिलता है। महाभारत में
द्रोपदी द्वारा कृष्ण की उंगली कटने पर द्रोपदी अपनी साड़ी पल्लो को
फाड़कर कृष्ण के उंगली को बंाधा था,तब से कृष्ण ने सारी उम्र रक्षा करने
का वचन दिया था। यह सब घटनाएं सावन की र्पुिणर््ामा को ही घटी थी इसलिए
इस दिन राखी मनाई जाती है
राखी के दस दिन पहले से ही भाई बहनो के लिए उपहार खरीदने लगते है।
बहने भी भाई के लिए राखी व उपहार खरीदने लगती है। अगर भाई दूर है तो बहने
पंाच दिन पहले ही राखियां पोस्ट करने लगती है। ताकि भाई को राखी के पहले
मिल जाए। कई विवाहित बहनों को भाई लेने भी जाते है। ताकि राखी का त्यौहार
मां-पिताजी भाई व अन्य सदस्यों के साथ मना सके। कुछ साल पहले राखियां
मोटे फोम बडे डिजाइन के प्लास्टिकफूल वाली राखियां मिलती थी,किंतु आज
राखियां कई डिजाइनों में मिलने लगी है।
कार्टुन-आजकल कार्टुन के चरित्र बच्चों को अत्यधिक आक र्षित कर रहे है।
बाजार में राखियां भी कार्टून वाली आ रही है
जैसे-डोरेमोन,छोटाभीम,कृष्ण,गणेश:चुटकी,सिनचेन,स्पाइडर मेन,लाईट वाली
बेनटेन व एंग्री बर्ड की राखियां बच्चों को लुभा रही है।
प्रिसियस स्टोन-सेमी प्रिशियस व प्रिशियस स्टोन की राखियां भी बहनो को
बहुत लुभाती है। यह स्टोन राखी कई रंगो में मिलती है। स्टोन के साथ
रंग-बिरंगी जरी व रेशम धागे इसे ओर भी सुंदर बना देती है। यह भाई की कलाई
पर बहुत फबती है।
मोतियों की राखियां-मोतियों से बनी राखियां सभी को आकृषित करती है। कुछ
राखियां तो असली सीप मोतियों से बनाई जाती है। मोतियों की राखी में
चमकीले रंग की रिंग या दूसरे रंग के मोती व डायमंड लगे हुए छोटे-छोटे ,
मोतियों की राखियों को अधिक सुंदर बना देती है।
फूल राखी-अलग अलग रंग व डिजाइन के प्लास्टिक फूल पर लगे हुए जरी रेशम व
रंग बिरंगे मोती, रेश्मी धागो पर बहुत ही सुंदर दिखाई देते है। ये
राखियां सस्ती व सुंदर दोनो होती है। कई बार असली फूल पत्ती की राखियां
भी बनाई जाती है जिनकी भीनी-भीनी खुश्बू मन मोह लेती है।
मेटल राखी-कई राखियों की सजावट मेटल व रंग-बिरंगी छोटी व बारिक लकड़ी से
किया जाता है। इन राखियों पर चमकीले रंग के मोती भी लगाए जाते है जो की
अत्यंत सुंदर दिखाई देती है।
चंदन राखी-चंदन की लकड़ी का उपयोग हमारे धाॢमक कार्यो में किया जाता है।
साधु संत चंदन का लेप व टिका माथे पर लगाते है।  चंदन की लकड़ी का उपयोग
हवन में भी किया जाता है। चंदन की लकड़ी की राखियां भी बनाई जाती है,
पहले राजा महाराजा यही राखियां बांधते थे। किंतु आजकल चंदन राखी का चलन
बहुत ही कम हो गया है।
सोने चांदी राखी-सोने चांदी की राखियो का दौर सदियों से चला आ रहा है।
पहले राज घरानों में सोने चांदी की ही राखियां बांधी जाती थी,किंतु अभी
भी इन राखियों का चलन बंद नही हुआ है । महंगाई के दौर में भी सोने चांदी
की राखियां लोगो को आकृषित कर रही है । कुछ बहने खरीद भी रही है।
रेशम की डोर-रेशम के धागों में छोटे मोती,अलग-अलग रंग के मीना व कोड़ी
लगी होती है। यह सिम्पल रेशम के धागे बहनो को बहुत आकृषित करते है।
लुम्बा राखी-यह राखी ननद भाभियों को बांधती है। यह ननद भाभी के प्यार को
दर्शाता है। लुम्बा राखी विशेषत: राजस्थान में बांधी जाती है किंतु अब यह
सभी जगह बांधी जाने लगी है।
वर्चुअल राखी– इस राखी की मांग अब अधिक से अधिक होने लगी है। आज के दौर
में शायद ही कोई क्षेत्र ऐसा होगा जहां आईटी इंडस्ट्री का प्रभाव न पड़ा
हो,तो भला यह त्यौहार केसे अछूता रह सकता है। वर्चुअल राखी सभी आनलाईन
स्टोर का हिस्सा है। आप सुंदर-सुंदर राखियों के साथ गिफ्ट भी अपने भाई
बहनो को भेज सकते है।

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