अच्छा ड्रेसअप भी एक कला है

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अच्छा ड्रेसअप भी एक कला है

आजकल महिला, पुरूष, बच्चे,जवान,वृद्ध सभी अपने आप को सुंदर,खूबसूरत व फैशनेबल बनाने में लगा हुआ है। वैसे तो भगवान ने सभी को सुंदर व खूबसूरत बनाया है। किंतु फिर भी लोग अपनी सुंदरता बढाने के लिए कुछ-कुछ सौंदर्य कलाएं करते रहते
है। पूर्ण रुप से सुंदर दिखने के लिए कपडो का भी उतना ही महत्व होता है जितना की मेकअप(रूप सज्जा) का। यदि हम बहुत सुंदर मेकअप कर ले किंतु हमारा ड्रेसअप अच्छा नही है तो हम अच्छे नही लगेगे। कहने का तात्पर्य यह है कि सही तरीके से कपडे पहनना भी एक कला है।
कहते है फस्र्ट इम्प्रेशन इज द लास्ट इम्प्रेशन। पहली नजर में आप कैसे दिखाई देते है? यह आप के परिधान पर निर्भर होता है। जैसे-आप बहुत अमीर व होशियार है किंतु आपके परिधान व्यवस्थित नही है तो आपको कोइ देखेगा भी नही क्योकि आप आकर्षक नही लग रहे है। इसके विपरित आप गरीब है किंतु आपका परिधान सुव्यवस्थित व उचित है तो आप आकर्षक लगेगे। उचित परिधान से ही व्यक्ति का व्यक्तित्व निखरता है। Read the rest of this entry

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माहौल का असर…..

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.उठो… सुबह के आठ बज गए आज संडे हे तो क्या १२ बजे तक सोएगें मीना रुपेश व चीनी को उठाती है। मां आज तो सोने दो थोड़ी देर, ठीक है पर रुपेश आप तो जाग जाइए। ओढऩे की चादर समेटते हुए बोलती है, में चाय बनाती हूं आप बालकनी में आइए वही पर चाय पीते है। रुपेश मूंह धोकर बालकनी में रखी चैयर पर बैठता है। मीना अखबार भी ले आना। मीना हां में जवाब देती है। मीना चाय के साथ अखबार भी ले आती है। मीना रूपेश को चाय देती है,और खुद भी चाय पीने लगती है । मीना भी चाय पीते पीते अखबार के पन्ने पलटने लगती है। एक खबर पर नजर टिक जाती है। हे भगवान, लगता है रोज रोज एक जैसी खबरे छपने लगी। रुपेश पूछता है क्यो ऐसा क्या पढ लिया देखो न हर दूसरे दिन ऐसी खबर छपती है । पडोसी ने पड़ोसी$ की हत्या कर दी या पडोसी ने घर लूट लिया। ऐसी खबर पढक र तो डर लगने लगा है। आज पडोसी ही पड़ोसी$ का दुश्मन बन गया है। हां भाई आज किसी पर विश्वास नही किया जा सकता है। चाय की चुस्की लेते अखबार में देखते हुए रुपेश बोलता है। मीना झट से बोली, हम कितने खुशनसीब है कि हमें हरीश श्वेता जैसे पड़ोसी मिले, वरना अ$ाजकल कौन किसका होता है। चाय खत्म होती नही, तभी बेडरुम से आवाज आती है म मा….म मा….हां बेटी आती हूं मेरी चीनी उठ गई, गुडमोर्निंग बेटू चलो ब्रश कर लो । चीनी को गोद में उठा कर बाथरुम में उतार देती है। ब्रश में पेस्ट लगाकर चीनी को देती है । चीनी ब्रश करके जल्दी आओ में नाश्ता बनाती हूं । मीना किचन में जाकर नाश्ता बनाती है। मीना किचन से आवाज देती है । चीनी नल चालू करके मत रखो पानी बर्बाद होता है। जल्दी आओ तु हारे पसंद का नाश्ता बनाया है। Read the rest of this entry

अंधी भक्ति से बचे..

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अंधी भक्ति से बचे..

हमारी वैदिक संस्कृति में प्रारंभ से ही गुरू को विशेष स्थान दिया गया है। हमारी संस्कृति में प्रत्येक व्यक्ति को अपने लिए गुरू बनाना अनिवार्य बताया गया है। कहते है जिसका गुरू नही होता उसका जीवन निरर्थक है। गुरू ही दुनिया में सच्चाई का रास्ता दिखाने वाला व भगवान की लो जगाने वाला होता है।
क्या आज हम अपना सच्चा गुरू ढूंढ पा रहे है? क्या हम यह जानते है कि सच्चा गुरू कैसा होना चाहिए? सच्चे गुरू की पहचान क्या होती है? नही आज हम सिर्फ भेड़ की चाल चल रहे है। किसी ने हमे बताया वह गुरू बहुत पहुचे हुए है, उनका आश्रम इतना बड़ा हे,उनके इतने अनुयायी है यह सब देख सुनकर ही हम आंख बंद करके उनको गुरू बना लेते है।
इसी तरह आजकल साधु बाबाओ व गुरूओं ने धर्म को रूपये कमाने का धंधा बना लिया है। आज धर्म के नाम पर सभी साधु संतों ने अपनी-अपनी दुकाने खोल रखी है। सभी संतो में प्रतिस्पर्धा लगी हुई है किसके पास सबसे ज्यादा अमीर व राजनैतिक शिष्य है जिनके पास ज्यादा राजनीतिज्ञ शिष्य है वह आज सबसे ज्यादा फेमस बाबा माने जाते है। आजकल के अधिकतर साधु बाबा पूर्णत: भोग-विलास,भ्रष्टाचार,व्यभिचार में लिप्त होकर  अपने धार्मिक भ्रष्ट कार्यो को बढ़ा रहे है।  भोली-भाली जनता भी इन धाॢमक धंधो के बाबाओ को नही पहचान पा रही है। साथ ही वह इन बाबाओं के प्रति अंधी आस्था में लिप्त होते जा रहे है। Read the rest of this entry

मुस्लिम महिलाओं को मिला न्याय..

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मुस्लिम महिलाओं को मिला न्याय..
२२ अगस्त२०१७ तारीख ऐतिहासिक हो गई है। इस दिन मुस्लिम महिलाओं को तलाक की जिल्लत से आजादी मिल गई है।  सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित कर दिया है। तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का फेसला भले ही एकमत से न आया हुआ हो लेकिन यह ऐतिहासिक फेसला है। यह फेसला मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की पुष्टि करता है। अब शौहर तीन बार तलाक  बोलकर एकतरफा तौर पर रिश्ता नही तोड़ सकता है।

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बच्चियों को बचाएं माहवारी के तनाव से

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आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपना लोहा मनmahavari-1वा चुकी है। कोई भी ऐसा क्षेत्र नही है जहां महिलाओं का हस्तक्षेप न हो। चांद पर जाने से लेकर लडाकू विमान को उड़ाने तक। इसी तरह बिजनेस क्षेत्र में भी कमान संभाल रखी है। खेल क्षेत्र में भी वह पीछे नही है। हाल ही में रियों ओलम्पिक में सिल्वर मेंडल जीतने वाली सिंधु और कांस्य पदक जीतने वाली साक्षी मलिक को कौन नही जानता है। आज महिलाओ ने हर क्षेत्र में अपना वर्चस्व बना रखा है। आज लड़की और लड़को में कोई अंतर नही समझा जाता है। दोनो को समान शिक्षा व रहन-सहन दिया जाता है।

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