बच्चियों को बचाएं माहवारी के तनाव से

सामान्य

आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपना लोहा मनmahavari-1वा चुकी है। कोई भी ऐसा क्षेत्र नही है जहां महिलाओं का हस्तक्षेप न हो। चांद पर जाने से लेकर लडाकू विमान को उड़ाने तक। इसी तरह बिजनेस क्षेत्र में भी कमान संभाल रखी है। खेल क्षेत्र में भी वह पीछे नही है। हाल ही में रियों ओलम्पिक में सिल्वर मेंडल जीतने वाली सिंधु और कांस्य पदक जीतने वाली साक्षी मलिक को कौन नही जानता है। आज महिलाओ ने हर क्षेत्र में अपना वर्चस्व बना रखा है। आज लड़की और लड़को में कोई अंतर नही समझा जाता है। दोनो को समान शिक्षा व रहन-सहन दिया जाता है।

Read the rest of this entry

प्रकृति से जोड़े बच्चों को…

सामान्य

prakatiहमारे घर के आंगन में हमने कई तरह के पेड़ पौधे लगा रखे है। ताकि पेड़ो से शुध्द वातावरण बना रहे। हमारी कालोनी के कई लोग पूजा पाठ के लिए आम के पत्त्ते व फूल तोडने आते रहते है। कुछ दिन पहले मेरे घर पर एक महाशय आए और नीम की पत्ती तोड़ते हुए पूछने लगे क्या यह नीम का पेड़ है?  मेरी मां ने हां में जवाब दिया।  मैं अंदर काम कर रही थी। मेंने जैसे ही यह सवाल सुना तो मैं दंग रह गई। मैं सोचने लगी ऐसा कौन व्यक्ति है जिसे नीम के पेड़ की जानकारी नही। मेंने काम छोड़ कर पहले बाहर आकर देखा कौन है? जो नही जानता। बाहर आकर देखा तो बड़े ही सभ्य पढ़े-लिखे महाशय सूट-बूट में  थे। मेंने उनसे पूछा भाईसाब आप कहां से आएं हंै? तो बोलने लगे मैं आपकी ही कालोनी में रहता हूं। मेंने बड़ी नम्रता से पूछा आपको नीम का पेड़ कैसा होता है इसकी जानकारी नही है क्या? वह हंसते हुए बोले मुझे थोड़ा कंफ्युज़न था। मंै सोच में पड़ गई हमारा देश किस ओर जा रहा है। इसी तरह कई मेट्रो सिटी के बच्चों को तो यह भी नहीं पता होता है,कि गेहूं, दाल,चावल,हरी सब्जियां Read the rest of this entry

अबला नही सबला बनँे…

सामान्य
अबला नही सबला बनँे…

८ मार्च को अंतराष्र्टि्रय महिला दिवस (वुमेंस डे) पूरी दुनिया में मनाया जाता है। आज के दिन महिलाओं का सम्मान व उनकी गौरव गाथाओं का वर्णन किया जाता है। सबसे पहले वुमेंस डे अमेरिका में २८ फरवरी १९०९ को मनाया गया। कुछ दिनों पश्चात फरवरी के आखरी रविवार को मनाने लगे। १९१० में सोशलिस्ट इंटरनेशनल के कोपेनहेगन के सम्मेलन में इसे अंतराष्र्टिय दिवस का दर्जा दिया गया। उस समय इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं को मत का अधिकार दिलाना था। क्योंकि उस समय अधिकतर देशो में महिलाओ को वोट देने का अधिकार नही था। इसी तरह १९१७ में रुस की महिलाओं ने,महिला दिवस पर रोटी और कपडे के लिये हड़ताल पर जाने का फेसला लिया था। यह हड़ताल ऐतिहासिक थी। इस हड़ताल से ज़ार ने सत्ता छोड़ी,अंतरिम सरकार ने महिलाओं को वोट देने का अधिकार दिया। उस समय रुस में जूलियन कैलेंडर चलता था और दूसरे देशो में ग्रेगोरियन कैलेंडर चलता था। इन दोनो कैलेंडर की तारीखों में अंतर था। जुलियन कैलेंडर के अनुसार फरवरी का आखरी रविवार २३-१९१७ था। जबकी ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार उस दिन ८ मार्च था। आज दुनिया में ग्रेगोरियन कैलेंडर चलता है। इसलिए ८ मार्च महिला दिवस के रुप में मनाया जाता है। ये तो हुआ महिला दिवस। Read the rest of this entry